क्यू दरवाजा मे सिर्फ दस्तक दे रही हो
क्यू दिलमे आके रूहको सता रही हो
क्यू बात करते भी कुछ केह नही रही हो
क्यू आशिक कहलाते हुए प्रेम दूसरे से जमा रही हो
क्यू मुज्रिम से ज्यादा बेकसुर को सजा दे रही हो
आखिर क्यू? क्यू खुदको ठग रही हो।