सायरी करता हु लेकिन सायर हुँ नही
प्रेम करता हु मगर प्रेमी कहलाता नही
जज्वाअो को बस उतारता हु जज्वाती (हुँ) नही
जेसेे कि मे यही हुँ, फिर भी मेरा पता और कही

दुनियाँ मै जाने कौन क्या हे
देख्ते एक है सभी
सब चिटी ही है तो हम दूर तारो से
कल हो आज हो या अभी