चले आकाशके तारे गिन्ने अपने छत
चडे आम तोडने दूसरे के वाग का दरख्त।
कुदे दूर गाउँ तालाब पे मछली को पकडने
मस्तिया बहुत की ये है हमारी बचपना ने।

सुरज से पहले जागकर खेल्ते थे क्रिकेट
चादर बिन बगिचे मे सो जाते थे लेट।
दिखाकर साहास करते थे उछल कुद
बचपनकी यादे छप जाती है बनाकर हमको सुद।