छुने से मेहसुस होता तो
पिने से प्यास मिट जाता तो
सब उड्ने वाले, परिन्दे कहलाते थे
और नाबोल्ने वाले, सब गुङ्गे।
जैसे कि मै, जो तुम्हे एक लब्ज भी कहना शका।
और परिन्दे कि तर्हा ख्वाबो मे ही उड्ता रहा
कि तुम आओगी और मेरी प्यार कि प्यास मिटोगी।
फिर भी मैने तो प्यार पिया लेकिन प्यासा मे मेहसुस कर ना सका।
क्यूकि दोनो हातो से ही तालीया बज्ति
दुलहे बिन दुल्हन सज नही सकती॥