दूरिया खामोसीको कम नही कर सकता
ये तो कही से भी उतना ही हल्ला मचा देता है
ना ही हकिकत कोई बडा शोर मचा सकता
ये दूर से उतना ही ललकारता है जितना नजदिक से कर पाता है।

जिन्दगी मे सन्नाटा और सच्चाई दोनो को नजदिक से देखा
कही बारी तो सन्नाटा सच्चाई बनकर दरवाजा मे दस्तक देता
और दूसरी वारी सच्चाई सन्नाटा ले कर मस्तिक मे आता
खैर दोनो ही उतना कोलाहल मचाता।